सुप्रीम कोर्ट ने अर्णब को दी गिरफ्तारी से राहत, महाराष्ट्र सरकार को लगाई फटकार

क्या आप भी इस खबर से खुश हुए है। अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी मामले पर आज (नवंबर 6, 2020) सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र विधानसभा के सचिव को फटकार लगाई है। और उनसे पूछा ऐसे कोई किसी को धमका सकता है। कोर्ट ने पूरे मामले पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करके उनके पत्र पर उनसे दो हफ्तों में जवाब माँगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अर्णब को राहत प्रदान करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उन्हें वर्तमान कार्यवाही के बाद गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई ने महाराष्ट्र विधानसभा के सचिव को शीर्ष न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का नोटिस जारी किया और इसमें उनसे कारण बताने को कहा गया कि आखिर क्यों उनके द्वारा लिखे पत्र के विरुद्ध कार्यवाही नहीं शुरू की जानी चाहिए। इसकी वजह क्या है आखिर ऐसा क्यो।

आज सुप्रीम कोर्ट में अर्णब की गिरफ्तारी का पूरा मामला वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने उठाया और अर्णब को किसी भी प्रकार की कार्रवाई से बचाने की अपील की। उन्होंने अर्णब की ओर से बताया कि उन्हें धमकी दी जा चुकी थी, “तुमने हमें गाली दी है। ये दीवाली तुम जेल में बिताओगे।”

कोर्ट ने सारा पक्ष सुनकर पूरे मामले पर हैरानी जताई कि आखिर किसी नागरिक को कोर्ट जाने से कैसे रोका सकता है। उसे कैसे धमकाया जा सकता है। सीजेआई ने नाराजगी महाराष्ट्र विधानसभा सचिव पर जाहिर करते हुए कि आखिर अनुच्छेद 32 किसलिए है? और ऐसे कैसे किया जा सकता है।

सीजेआई ने कहा, “हमारे पास पत्र लिखने वाले के लिए गंभीर सवाल है और हमारे लिए इसे अनदेखा करना बेहद मुश्किल है।” सीजेआई विधानसभा सचिव के पत्र पर बोले, “ये न्याय की प्रक्रिया में व्यवधान है, पत्र लिखने वाले की भाषा अर्णब को धमकाने वाली है। ऐसा लगता है जैसे पत्र लिखने वाली की मंशा याचिकाकर्ता को डराने वाली थी क्योंकि उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।”

अर्णब गोस्वामी को बुधवार को बिना समन जारी किए जबरदस्ती घर से उठाया गया था। कुछ पुलिस अधिकारी उनके घर पहुँचे थे और उनके साथ मारपीट करते हुए उन्हें एक पुराने केस में गिरफ्तार किया था।

इसके बाद अर्णब की कई वीडियोज सामने आई थी। वीडियो में उनके शरीर पर मारपीट के निशान साफ नजर आए थे, जिसे देख जगह-जगह मुंबई पुलिस के रवैये की आलोचना हुई थी।

देर रात तक अदालत की सुनवाई चलने के बाद अर्णब को कल 18 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया जबकि मुंबई पुलिस लगातार 14 दिन की हिरासत का अनुरोध कर रही थी। अदालत ने पुलिस से कहा कि हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है।

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